बोइता बंधान उत्सव और बंदर दिवस में मुख्यमंत्री की सहभागिता।

औद्योगिक समृद्ध पारादीप के अंतर्मन में निहित ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और पौराणिक स्वरूप पर शोध आवश्यक: मुख्यमंत्री
पाइप के माध्यम से ईंधन गैस परियोजना तथा 24.89 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित तीन लेन युक्त 500 मीटर लंबे एवं भारी वाहनों के अनुकूल पुल का शिलान्यास

पारादीप, दिनांक 15.11.24 – माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी आज पारादीप पोर्ट के वेट बेसिन में आयोजित बोइता बंदाण उत्सव एवं बंदर दिवस में शामिल हुए। मुख्यमंत्री सबसे पहले अपनी धर्मपत्नी के साथ वेट बेसिन पहुँचे, जहाँ पारंपरिक लोकनृत्य के साथ उन्हें होम मंडप तक ले जाया गया। इसके पश्चात उन्होंने पारंपरिक कलश को पूर्व से सुसज्जित साधव-साधवानी को सौंपा। साधवों को विदाई देने के उद्देश्य से ओड़िया अस्मिता के प्रतीक ‘बोइता’ को ध्वज दिखाकर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर आयोजित सभा में उपस्थित जनसमूह का अभिवादन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा के सभी पर्व धार्मिक भावनाओं से जुड़े हैं, जबकि बोइता बंदाण और बाली यात्रा ओडिशा के प्राचीन समुद्री व्यापार इतिहास से संबंधित हैं। उसी गौरवपूर्ण इतिहास की स्मृति को जीवंत रखने के लिए पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण परंपरागत रूप से इस उत्सव का आयोजन करता आ रहा है। कलिंग की महान समुद्री व्यापार परंपरा इस धरती के वीर साधव पुत्रों की साहसिक जलयात्राओं और विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के साथ उनके व्यापारिक संबंधों को उजागर करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारादीप का नाम लेते ही एक विशेष अनुभूति होती है। वर्ष 1962 के जनवरी माह में जहाँ समुद्र तट पर हेंताल के जंगल, मच्छर, सरीसृप और दलदली भूमि के कारण अस्वस्थ वातावरण था, वहीं आज वही स्थान विशाल इमारतों से सुसज्जित आधुनिक नगरी में परिवर्तित होकर आधुनिक ओडिशा की प्रगति का द्वार और अर्थव्यवस्था का कोणार्क बन चुका है।

उन्होंने कहा कि समुद्र की ऊँची लहरों के बीच सुदूर जावा, सुमात्रा, इंडोनेशिया, कंबोडिया, सिंहल और चीन जैसे देशों तक साधव पुत्रों की जलयात्रा, माँ मंगला के प्रति उनकी आस्था, अपार धन के साथ स्वदेश वापसी, कलिंग संस्कृति का प्रचार-प्रसार तथा उपनिवेश स्थापना की गाथाएँ आज भी मन को रोमांचित करती हैं। आज के औद्योगिक रूप से समृद्ध पारादीप के पीछे जो ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और पौराणिक स्वरूप निहित है, उस पर गहन शोध की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारादीप बंदरगाह आज विश्व के श्रेष्ठ बंदरगाहों में से एक है। भारत सरकार के बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय द्वारा माल परिवहन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इसे ‘सागर श्रेष्ठ सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। खनिज संपदा से समृद्ध उनके निर्वाचन क्षेत्र का अधिकांश निर्यात पारादीप बंदरगाह से होता है, इसलिए इसे ओडिशा की अर्थव्यवस्था का मुख्य द्वार कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल खनिज निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देश के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता, औद्योगिक अवसंरचना तथा सहयोग को देखते हुए प्रतिष्ठित उद्योगपति ओडिशा में निवेश और औद्योगिक विस्तार के लिए इच्छुक हैं। ‘उत्कर्ष ओडिशा’ के माध्यम से यह प्रयास जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री के ‘पूर्वोदय से भारत उदय’ आह्वान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सागरमाला योजना के अंतर्गत बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, नए बंदरगाहों की स्थापना तथा तटीय समुदायों के विकास के लिए प्रयास जारी हैं। 15,000 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय जलमार्ग का निर्माण होगा, जो तालचेर से कलिंगनगर होते हुए पारादीप को जोड़ेगा और पूर्वी भारत के विकास को गति देगा। ‘Maritime India Vision 2030’ और अमृत काल 2047 तक भारतीय बंदरगाह क्षेत्र में लगभग 70 लाख करोड़ रुपये के निवेश से भारत और ओडिशा को वैश्विक पहचान मिलेगी।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के स्वप्न “हर घर में पीएनजी, सुरक्षित ईंधन और बेहतर जीवन” के तहत पारादीप पोर्ट और बीपीसीएल के सहयोग से बंदर क्षेत्र के 7,000 से अधिक घरों के लिए पाइप के माध्यम से ईंधन गैस परियोजना का शुभारंभ किया। इससे प्रत्येक घर तक 40 प्रतिशत कम लागत में पीएनजी उपलब्ध होगी।

साथ ही 24.89 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित तीन लेन युक्त 500 मीटर लंबे और भारी वाहनों के अनुकूल पुल का शिलान्यास किया गया। इस पुल में पैदल यात्रियों के लिए मार्ग तथा नई पाइपलाइन कॉरिडोर की सुविधा भी होगी।

इस कार्यक्रम में ओडिशा के उद्योग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री संपद चंद्र स्वाईं, जगतसिंहपुर सांसद श्री विभू प्रसाद तराई, जिलाधिकारी श्री जे. सोनल, डीआईजी श्री चरण सिंह मीणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। पारादीप बंदरगाह के अध्यक्ष श्री पी.एल. हरनाध ने स्वागत भाषण दिया और बंदरगाह की अभूतपूर्व उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पारादीप बंदरगाह देश का नंबर एक प्रमुख बंदरगाह बन चुका है तथा 2047 तक इसकी क्षमता 500 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। अंत में बंदरगाह उपाध्यक्ष श्री नीलाभ्र दासगुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर बंदरगाह के अधिकारी, विभिन्न विभागों के सरकारी अधिकारी, स्थानीय नागरिक, वरिष्ठ बुद्धिजीवी एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।