इसे मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:
निवारक सतर्कता
दंडात्मक सतर्कता
सहभागी सतर्कता
निगरानी एवं अन्वेषण
हालांकि कदाचार एवं अन्य अनियमितताओं के लिए ‘दंडात्मक कार्रवाई’ अत्यंत महत्वपूर्ण है, परंतु सीवीओ द्वारा अपनाए जाने वाले निगरानी एवं निवारक उपाय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये सतर्कता मामलों की घटनाओं को काफी हद तक कम करते हैं। अतः सतर्कता विभाग की भूमिका मुख्यतः निवारक होनी चाहिए।
निवारक सतर्कता (
भ्रष्टाचार की संभावना की पहचान करने तथा आवश्यक संशोधन हेतु विद्यमान प्रक्रियाओं एवं प्रथाओं का अध्ययन करना।
विलंब के कारणों की पहचान करना तथा उन्हें न्यूनतम करने के लिए उपयुक्त उपाय करना।
यह सुनिश्चित करने के लिए विधियां विकसित करना कि विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग मनमाने ढंग से न हो।
नागरिकों को विभिन्न मामलों से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित करना तथा जहां संभव हो उन्हें सरल बनाना।
संवेदनशील पदों की पहचान करना तथा विशेष रूप से अधिकारियों के नियमित स्थानांतरण को सुनिश्चित करना।
भ्रष्टाचार की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करना तथा वहां सिद्ध ईमानदारी वाले अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना।
यह सुनिश्चित करना कि संगठन ने महत्वपूर्ण विषयों पर नियमावली (मैनुअल) तैयार की है।
एक प्रभावी व्हिसल ब्लोअर तंत्र का विकास एवं क्रियान्वयन करना।
प्रभावी निवारक सतर्कता हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।
ईमानदारी से संबंधित आचरण नियमों के पालन को सुनिश्चित करना, जिनमें शामिल हैं:
संपत्ति विवरण
अचल संपत्ति विवरणों की जांच
बेनामी लेन-देन पर निगरानी
आयोग के निर्देशानुसार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का आयोजन सुनिश्चित करना।
निम्नलिखित की जांच करना:
आंतरिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट
वैधानिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट
कैग (CAG) लेखा परीक्षा रिपोर्ट
संदिग्ध ईमानदारी वाले अधिकारियों की सूची तथा सहमति सूची तैयार करना।
सीटीई प्रकार के निरीक्षण करना।
दंडात्मक सतर्कता
दंडात्मक सतर्कता के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य किए जाने अपेक्षित हैं:
सभी स्रोतों से प्राप्त शिकायतों को प्राप्त करना एवं उनकी जांच करना कि उनमें सतर्कता का पहलू है या नहीं। संदिग्ध मामलों को प्रशासनिक प्रमुख को संदर्भित करना।
सीवीसी, सीबीआई अथवा अध्यक्ष, पीपीए द्वारा अग्रेषित विशिष्ट, सत्यापन योग्य आरोपों की जांच करना या करवाना।
जांच रिपोर्टों का शीघ्र निपटान करना तथा सक्षम प्राधिकारी के आदेश एवं जहां आवश्यक हो आयोग की सलाह प्राप्त करना।
यह सुनिश्चित करना कि आरोप पत्र विधिवत तैयार हों तथा बिना विलंब जारी किए जाएं।
जांच प्राधिकारी की समय पर नियुक्ति सुनिश्चित करना।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट की साक्ष्यों के आधार पर जांच करना तथा सक्षम प्राधिकारी का निर्णय एवं जहां आवश्यक हो आयोग/यूपीएससी की सलाह प्राप्त करना।
यह सुनिश्चित करना कि अनुशासनिक प्राधिकारी स्वतंत्र विवेक का प्रयोग करते हुए कारण सहित (स्पीकिंग ऑर्डर) आदेश जारी करे।
अनुशासनात्मक नियमों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करना, क्योंकि किसी भी उल्लंघन से कार्यवाही निरस्त हो सकती है।
यह सुनिश्चित करना कि सतर्कता मामलों के विभिन्न चरणों हेतु निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन हो।
निगरानी
प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में सभी लंबित मामलों (जांच रिपोर्ट, अनुशासनात्मक मामले, शिकायतें) की समीक्षा करना।
सतर्कता कार्यों की समीक्षा मंत्रालय/विभाग के सचिव द्वारा बैठकों में कराई जाना।
आपसी हित के मामलों पर सीबीआई अधिकारियों के साथ समय-समय पर बैठकें आयोजित करना।
प्रत्येक माह किए गए कार्य की मासिक रिपोर्ट आगामी माह की 5 तारीख तक आयोग को भेजना सुनिश्चित करना।
सतर्कता कार्य पर वार्षिक रिपोर्ट आगामी वर्ष की 30 जनवरी तक आयोग को भेजना।
खरीद से संबंधित तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) आगामी माह की 15 तारीख तक सीटीई को भेजना सुनिश्चित करना।
सहभागी सतर्कता
आयोग के निर्देशानुसार कर्मचारियों की सतर्कता जागरूकता सप्ताह में भागीदारी सुनिश्चित करना।
नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु हितधारकों, छात्रों एवं आम जनता की सतर्कता जागरूकता सप्ताह में भागीदारी सुनिश्चित करना।